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जानिये “कहां राजा भोज और कहाँ गंगू तेली” के पीछे की कहानी

Story Of Kaha Raja Bhoj Kaha Gangu Teli | इस कहावत को फिल्मी गाने में भी पिरोया गया। यही नहीं, तंज कसने के लिए भी इस कहावत का प्रयोग किया जाता हैं। कहावत लोकप्रिय है। ह ऐसी है कि आम बोलचाल में कहीं न कहीं सभी के जुबान से निकल ही जाती है। लेकिन इस कहावत की कहानी की सत्यता क्या है ?? हम इस पर प्रकाश डालेंगे।
Kaha Raja Bhoj Kaha Gangu Teli 

घर में पूजन सम्बन्धी नियम कायदे


अधिकांश हिन्दुओं के घर में पूजन के लिए छोटे छोटे मंदिर बने होते है जहां की वो भगवान की नियमित पूजा करते है। लेकिन हममे में से अधिकांश लोग अज्ञानतावश पूजन सम्बन्धी छोटे छोटे नियमों का पालन नहीं करते है। जिससे की हमे पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आज हम आपको घर में पूजन सम्बन्धी कुछ ऐसे ही नियम बताएँगे जिनका पालन करने से हमे पूजन का श्रेष्ठ फल शीघ्र प्राप्त होगा।

आखिर क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस ?

                                                                    Image Credit Wikipedia

आज हम आपको महाभारत से जुडी एक घटना बताते है जिसमे पांचो पांडवों ने अपने मृत पिता पाण्डु का मांस खाया था उन्होंने ऐसा क्यों किया यह जानने के लिए पहले हमे पांडवो के जनम के बारे में जानना पड़ेगा। पाण्डु के पांच पुत्र युधिष्ठर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव थे।  इनमे से युधिष्ठर, भीम और अर्जुन की माता कुंती तथा नकुल और सहदेव की माता माद्री थी। पाण्डु इन पाँचों पुत्रों के पिता तो थे पर इनका जनम पाण्डु के वीर्य तथा सम्भोग से नहीं हुआ था

महाभारत की 10 अनसुनी कहानियाँ


Untold Mythological Stories of Mahabharat
Image Credit Facebook
महाभारत की कहानियाँ हम बचपन से सुनते आ रहे हैं, टेलीविज़न पर देखते आ रहे है फिर भी हम सब महाभारत के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते है क्योकि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत बहुत ही बड़ा ग्रंथ है, इसमें एक लाख श्लोक है। आज हम आपको महाभारत की कुछ ऐसी ही कहानियां पढ़ाएंगे  जो आपने शायद पहले कभी नहीं पढ़ी होगी। तो आइये शुरुआत करते है मामा शकुनि से।  हम सब मानते है की शकुनि कौरवों का सबसे बड़ा हितैषी था जबकि है इसका बिलकुल विपरीत। शकुनि ही कौरवों के विनाश का सबसे बड़ा कारण था, उसने ही कौरवों का वंश समाप्त करने के लिए महाभारत के युद्ध की पृष्टभूमि तैयार की थी।  पर उसने ऐसा किया क्यों ? इसका उत्तर जानने के लिए हमे ध्रतराष्ट्र और गांधारी के विवाह से कथा प्रारम्भ करनी पड़ेगी।

10 Most Mysterious Places in India

Reading and studying about mystery is a topic, always of interest to a lot of people. Like many others, India also has a lot of mystery connection to it. Here is a list of 10 most mysterious places in India:

Ghost Town of Kuldhara, Rajasthan

हिमाचल का गीयू गांव - यहाँ है 550 साल पुरानी एक संत कि प्राकर्तिक ममी - अभी भी बढ़ते है बाल और नाखून

किसी भी इंसान कि मौत के बाद उसके शव(Dead Body) को केमिकल्स से संरक्षित करके ममी(Mummy) बनाई जाती है, यह विधि प्राचीन मिस्र सभ्यता में बड़े पैमाने पर अपनाई जाती थी।  मिस्र के अलावा दूसरे देशो में भी शवो कि Mummy बनाई गयी है जैसे किइटली का कापूचिन कैटाकॉम्ब जहा पर सदियो पुराने 8000 शवो को Mummy बनाकर रखा गया है। लेकिन विशव में अनेक जगह प्राकर्तिक ममी(Natural Mummy) भी पायी गयी है यानि कि बिना किसी केमिकल के संरक्षित किये सदियो पुराने ऐसे शव(Dead body) जो आज भी सामान्य अवस्था में है।  ऐसी ही कुछ Natural Mummy हमारे भारत(India) में भी है जिसमे से एक गोवा के बोम जीसस चर्च में रखी संत फ्रांसिस जेवियर कि ममी के बारे में हमने आपको बताया था।

तनोट माता मंदिर (जैसलमेर) - जहा पाकिस्तान के गिराए 3000 बम हुए थे बेअसर


तनोट माता का मंदिर जैसलमेर से करीब 130 किलो मीटर दूर भारत - पाकिस्तान बॉर्डर के निकट स्थित है। यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है।  वैसे तो यह मंदिर सदैव ही आस्था का केंद्र रहा है पर 1965 कि भारत - पाकिस्तान लड़ाई के बाद यह मंदिर देश - विदेश  में अपने चमत्कारों के लिए प्रशिद्ध हो गया।

1965 कि लड़ाई में पाकिस्तानी सेना कि तरफ से गिराए गए करीब 3000 बम भी इस मंदिर पर खरोच तक नहीं ला सके, यहाँ तक कि मंदिर परिसर में गिरे 450 बम तो फटे तक नहीं। ये बम अब मंदिर परिसर में बने एक संग्रहालय में भक्तो के दर्शन के लिए रखे हुए है।
Museum with Unexploded Bombs At Tanot Mata Temple
Museum with Unexploded Bombs At Tanot Mata Temple

पारिजात वृक्ष - किंटूर - छुने मात्र से मिट जाती है थकान - महाभारत काल से है संबध

वैसे तो पारिजात वृक्ष पुरे भारत में पाये जाते है, पर किंटूर में स्तिथ पारिजात वृक्ष अपने आप कई मायनों में अनूठा है तथा यह अपनी तरह का पुरे भारत में इकलौता पारिजात वृक्ष है। उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर कि दूरी पर किंटूर गाँव है। इस जगह का नामकरण पाण्डवों कि माता कुन्ती के नाम पर हुआ है। यहाँ पर पाण्डवों ने माता कुन्ती के साथ अपना अज्ञातवास बिताया था। इसी किंटूर गाँव में भारत का एक मात्र पारिजात का पेड़ पाया जाता है। कहते है कि पारिजात के वृक्ष को छूने मात्र से सारी थकान मिट जाती है।

Parijaat Tree

भूपत सिंह चौहाण - इंडियन रॉबिन हुड - जिसे कभी पुलिस पकड़ नहीं पायी

यह बात आजादी के पहले की है। इस समय देश में राजा-रजवाड़ों का शासन चलता था। भारत की संपत्ति व संपदा लूटने में अंग्रेज कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। इतना ही नहीं, अपने स्वार्थ के लिए देश के कई राजा-रजवाडे भी अंग्रेजों के साथ मिलकर देश को लूट रहे थे और जनता अनकों तरह की यातनाएं भुगतते हुए भूखी-प्यासी मर रही थी। इस समय देश में चारों ओर सिर्फ लूटपाट का ही नगाड़ा बज रहा था।


इसी समय वडोदरा के शासक गायकवाड परिवार को एक चिट्ठी मिलती है, जिसमें पूरे परिवार को धमकी लिखी थी..‘महल में काम करने वाले सभी 42 नौकरों को उनकी सेवानिवृत्ति के समय पांच-पांच वीघा जमीन दी जाए और इसकी जाहिर सूचना पूरे शहर में भी दी जाए। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो परिवार के सभी सदस्यों की एक-एक कर हत्या कर दी जाएगी।’ इस धमकी भरे पत्र के नीचे नाम लिखा था.. भूपत सिंह चौहाण। यह वही भूपतसिंह था, जिसने वडोदरा से लेकर दिल्ली की सरकार तक के नाक में दम कर रखा था।

सत्य घटना - सांप ने काटा, डाकटरों ने मृत घोषित किया, घरवालों ने गंगा में बहाया, 14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक

कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाये घट जाती है  जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है।  ऐसी ही एक घटना हाल ही में बरेली के देबरनिया थाना क्षेत्र के भुड़वा नगला गांव में घटी जब उस गाँव का मृत लड़का 14  साल बाद जिन्दा घर लौट आया। लड़के का नाम  छत्रपाल व उसके पिता का नाम नन्थू लाल है। नन्थू लाल के घर बेटे को देखने वालों की भीड़ जमा हो रही है। लड़के के परिजन और गाँव वाले उसको पहचान चुके है। हर जगह छत्रपाल चर्चा का विषय बना हुआ है।  लोग इस चमत्कार को नमस्कार करने पर मजबूर हैं। आइये अब हम आपको छत्रपाल के मरने से लेकर वापस लौटने कि घटना को विस्तारपूर्वक बताते है।  

Snake Real story
 छत्रपाल (Photo Via Bhaskar)

किराडू - राजस्थान का खजुराहो - 900 सालो से है वीरान

किराडू राजस्थान के बाड़मेर जिले में  स्थित है। किराडू अपने मंदिरों कि शिल्प कला के लिया विख्यात है। इन मंदिरों का निर्माण 11  वि शताब्दी में हुआ था।  किराडू को राजस्थान का खजुराहों भी कहा जाता है। लेकिन किराडू को खजुराहो जैसी ख्याति नहीं मिल पाई क्योकि यह जगह पिछले 900 सालों से वीरान है और आज भी यहाँ पर दिन में कुछ चहल - पहल रहती है पर शाम होते ही यह जगह वीरान हो जाती है , सूर्यास्त के बाद यहाँ पर कोई भी नहीं रुकता है। राजस्थान के इतिहासकारों के अनुसार किराडू शहर अपने समय में सुख सुविधाओं से युक्त एक विकसित प्रदेश था।  दूसरे प्रदेशों के लोग यहाँ पर व्यपार करने आते थे। लेकिन 12  वि शताब्दी में, जब किराडू पर परमार वंश का राज था , यह शहर वीरान हो जाता है।  आखिर ऐसा क्यों होता है, इसकी कोई पुख्ता जानकारी तो इतिहास में उपलब्ध नहीं है पर इस को लेकर एक कथा प्रचलित है जो इस प्रकार है।










राजा जगतपाल सिंह का शापित किला - एक शाप के कारण किला बन गया खंडहर

झारखण्ड की राजधानी से 18 किलोमीटर की दुरी पर, रांची-पतरातू मार्ग के पिठौरिया गांव में 2 शताब्दी पुराना राजा जगतपाल सिंह का किला है।  किसी जमाने में 100 कमरो वाला विशाल महल अब खंडहर में तब्दील हो चुका है। इसके खंडहर में तब्दील का कारण इस किले पर हर साल बिजली गिरना है।  आश्चर्य जनक रूप से इस किले पर दशको से हर साल बिजली गिरती आ रही है जिससे की हर साल इसका कुछ हिस्सा टूट कर गिर जाता है। दशको से ऐसा होते रहने के कारण यह किला अब बिलकुल खंडहर हो चुका है। आप माने या ना माने लेकिन गांव वालो के अनुसार इस किले पर हर साल बिजली एक क्रांतिकारी द्वारा राजा जगतपाल सिंह को दिए गए श्राप के कारण गिरती है।  वैसे तो बिजली गिरना एक प्राकृति घटना है लेकिन एक ही जगह पर दशको से लगातार बिजली गिरना जरूर आश्चर्य की बात है।

Ruins of fort Jagt pal Singh
खंडहर हो चुके महल के अवशेष   All Images Credit Dr. Nitish Priyadarshi

बावनी इमली शहीद स्मारक - फतेहपुर - एक इमली का पेड़ जिस पर अंग्रेजो ने 52 क्रांतिकारियों को एक साथ लटकाया था फांसी पर

हमारे देश को अंग्रेजो की दासता से मुक्त कराने के लिए अनगिनत क्रांतिकारियों ने अपनी जान भारत माँ के नाम कुर्बान करी थी। इन शहीदो की शाहदत को नमन करने के लिए अनेको जगह शहीद स्मारक बने  हुए है, जो की हमें उन आज़ादी के सिपाहियों कि देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए बलिदानो की याद दिलाते है। ऐसे ही एक क्रांतिकारी बाबू बंधू सिंह के शहीद स्मारक के बारे में हम आपको पहले ही बता चुके है जो की अँगरेज़ सैनिको के सिर काटकर तरकुलहा देवी के चरणो में चढ़ा देते थे। आज हम आपको ऐसे ही एक और स्मारक के बारे में बता रहे है जो की इतिहास में बावनी इमली के नाम से जाना जाता है। असल में यह एक इमली का पेड़ है जिस पर अंग्रेजो ने 28 अप्रेल 1858 को 52 क्रांतिकारियों को एक साथ फांसी पर लटका दिया था। यह पेड़ गवाह है अंग्रेजो की नाक में दम करने वाले क्रांतिकारी जोधा सिंह अटैया और उनके 51 साथियो की शाहदत का।

Image Credit Bhaskar.com

दीमापुर - नागालैंड - यहाँ है शतरंज की विशाल गोटिया जिनसे खेलते थे भीम और घटोत्कच


आज हम आपको एक ऐसी जगह की यात्रा पर ले चलते है जहा रखी महाभारत काल की विरासत आज भी पर्यटकों को  बहुत आकर्षित  करती है। यह जगह है भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य नागालैंड का एक शहर दीमापुर जिसको कभी हिडिंबापुर के नाम से जाना जाता था। इस जगह महाभारत काल में हिडिंब राक्षस और उसकी बहन हिडिंबा रहा करते थे।  यही पर हिडिंबा ने भीम से विवाह किया था।  यहां बहुलता में रहनेवाली डिमाशा जनजाति खुद को भीम की पत्नी हिडिंबा का वंशज मानती है। यहाँ आज भी हिडिंबा का वाड़ा है, जहां राजवाड़ी में स्थित शतरंज की ऊंची-ऊंची गोटियां पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है। इनमे से कुछ अब टूट चुकी है। यहाँ के निवासियों कि मान्यता है  कि इन गोटियों से भीम और उसका पुत्र घटोत्कच शतरंज खेलते थे। इस जगह पांडवो ने अपने वनवास का काफी समय व्यतीत किया था।

Giant Chess board at Dimapur
Image credit 

बुलंदशहर में भी है प्यार की अमर निशानी 'ताज महल'

आगरा में स्तिथ है, प्यार की अमर निशानी ताजमहल जिसका निर्माण शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ महल के लिए 1631 में करवाया था।  किसे पता थी की इसके ठीक 381 साल बाद 2012 में एक पति अपनी पत्नी की याद में एक और ताजमहल का निर्माण करवाएगा।  हालांकि अबकी बार ताजमहल का निर्माण करवाने वाला कोई राजा महाराजा नहीं बल्कि एक रिटायर्ड पोस्टमास्टर है और जगह आगरा नहीं बल्कि बुलंदशहर है।

Mini Taj Mahal - Bulandshahr

भारत के प्रसिद्ध 16 हनुमान मंदिर (16 famous Hanuman Temple of India)

इस लेख में आप सब भारत के विभिन्न हिस्सों में स्तिथ 16 प्रसीद्ध हनुमान मंदिरों की बारे में जानकारी पाएंगे। इनमे से हर मंदिर की अपनी एक विशेषता है कोई मंदीर अपनी प्राचीनता की लिये फेमस है तो कोइ मंदीर अपनी भव्यता के लिए। जबकि कई मंदिर अपनी अनोखी हनुमान मूर्त्तियों के लिए जैसे की इलाहबाद का हनुमान मंदीर जहां की भारत की एक मात्र लेटे  हुए हनूमान की प्रतिमा है जबकि इंदौर के उलटे हनुमान मंदिर में भारत कि एक मात्र उलटे हनुमान कि प्रतीमा  हैं इसी तरह रतनपुर के गिरिजाबंध हनुमान मंदिर में स्त्री रुप में हनुमान प्रतीमा है।  इन सबसे अलग गुजरात के जामनगर के बाल हनूमान मंदीर का नाम एक अनोखे रिकॉर्ड क़े कारण गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।


1. हनुमान मंदिर, इलाहबाद, उत्तर प्रदेश (Hanuman Temple,  Allahabad,  Uttar Pradesh) :

Sleeping Hanuman Temple, Allahabad, Uttar Pradesh
Sleeping Hanuman Temple, Allahabad, Uttar Pradesh


इलाहबाद किले से सटा यह मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा वाला एक छोटा किन्तु प्राचीन मंदिर है। यह सम्पूर्ण भारत का केवल एकमात्र मंदिर है जिसमें हनुमान जी लेटी हुई मुद्रा में हैं। यहां पर स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा 20 फीट लम्बी है। जब वर्षा के दिनों में बाढ़ आती है और यह सारा स्थान जलमग्न हो जाता है, तब हनुमानजी की इस मूर्ति को कहीं ओर ले जाकर सुरक्षित रखा जाता है। उपयुक्त समय आने पर इस प्रतिमा को पुन: यहीं लाया जाता है।

लैला मजनूं की मज़ार - बिन्जौर - अनूपगढ - राजस्थान

लैला-मजनू , जिनके प्यार की मिसाल आज भी दी जाती है, का अंतिम स्मारक राजस्थान में स्तिथ है। प्रेम तथा धार्मिक आस्था की प्रतिक 'लैला मजनूं की मज़ार' राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की अनूपगढ तहसील में भारत-पाकिस्तान सीमा पर बसे बिन्जौर गाँव में स्तिथ है।  यह जगह पाकिस्तान से महज़ 2 किलो मीटर दूर है। कहते है लैला और मजनू ने अपने प्यार में विफल होने पर यही जान दी थी।  ख़ास बात यह है की जीते-जी चाहे वो न मिल पाये लेकिन उन दोनो की मज़ारे पास पास है। हालांकि कुछ लोग इन्हे लैला मजनू की मजार न मान कर किसी अज्ञात गुरु शिष्य कि मजार मानते है।

laila majnu ki mazar - Binjaur - Anupgarh - Rajasthan
 Image Credit Wikipedia

भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) - भोपाल - यहाँ है एक ही पत्थर से निर्मित विशव का सबसे बड़ा शिवलिंग (World's tallest shivlinga made by one rock)

भोजपुर (Bhojpur), मध्य प्रदेश कि राजधानी भोपाल से 32 किलो मीटर दूर स्तिथ है। भोजपुर से लगती हुई पहाड़ी पर एक विशाल, अधूरा शिव मंदिर हैं। यह भोजपुर शिव मंदिर (Bhojpur Shiv Temple) या भोजेश्वर मंदिर (Bhojeshwar Temple) के नाम से प्रसिद्ध हैं।  भोजपुर तथा इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई - 1055 ई ) द्वारा किया गया था। इस मंदिर  कि अपनी कई विशेषताएं हैं।

इस मंदिर कि पहली विशेषता इसका विशाल शिवलिंग हैं जो कि विशव का एक ही पत्थर से निर्मित सबसे बड़ा शिवलिंग (World's Tallest Shiv Linga) हैं।  सम्पूर्ण शिवलिंग कि लम्बाई 5.5 मीटर (18 फीट ), व्यास 2.3 मीटर (7.5 फीट ), तथा केवल लिंग कि लम्बाई 3.85 मीटर (12 फीट ) है।

World's tallest shivling at Bhojpur Shiv mandir

India's Oldest Operable Water Flour Mill at Haryana

हम से अधिकतर लोगो ने बिजली से चलने वाली आटा चक्की देखी है , कुछ पुराने लोगो ने हाथ से चलने वाली चक्की भी देखी होगी पर शायद ही हम में से किसी ने पानी से चलने वाली आटा चक्की देखी होगी। हमारे देश में अब कुछ ही Water Flour Mill बची है,पर इनमे से एक चक्की ऐसी भी है जो कि 123साल पुरानी है। यह चक्की भारत के हरियाणा राज्य के कैथल ज़िले में  है, इसका निर्माण सन 1890 में हुआ था। इस आटा चक्की कि खासियत यह है कि  इससे पिसा हुआ आटा  भी एक दम ठंडा होता है।  यह भारत कि सबसे पुरानी चालू Water Flour Mill है।

Pan Aata Chakki - Haryana


" काला अंब " एक आम का पेड़ जिसको काटने से निकलता था खून




हर जगह के नाम के पीछे कुछ न कुछ कहानी जरुर होती है जिसे की बहुत ही कम लोग जानते है ऐसी  ही एक जगह है "काला अंब" जहा की पानीपत का तीसरा युद्ध लड़ा गया था। इस जगह का नाम एक ऐसे आम के पेड़ के कारण पड़ा है जिसको काटने पर खून  निकलता था।

पानीपत की जमीन पर तीन युद्ध लड़े गए थे, जो सन् 1526, सन् 1556 और सन् 1761 में लड़े गए। पानीपत का तीसरा युद्ध मराठों और मुगलों के बीच लड़ा गया था। मराठों की तरफ से सदाशिवराव भाऊ और मुगलों की ओर से अहमदशाह अब्दाली ने नेतृत्व किया थ


Ahmed Shah Abdali, Sadashiv rao bhau

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